Bhagwad Gita . 8.6 यं यं वापि स्मरन्भावं त्यजत्यन्ते कलेवरम् । तं तमेवैति कौन्तेय सदा तद्भावभावित: ॥ ६ ॥ yaṁ yaṁ vāpi smaran bhāvaṁ tyajaty ante kalevaram taṁ tam evaiti kaunteya sadā tad-bhāva-bhāvitaḥ https://vedabase.io/en/library/bg/8/6/ इस श्लोक में भगवान हमको चेतावनी भी दे रहे है, और बहुत सुंदर भविष्य भी दिखा रहे है। सुंदर भविष्य जिसने exam के लिए तैयारी किया है, अच्छी preparation किया है, पूरे जीवन भर अभ्यास किया है, इस पाठशाला (स्कूल) को गम्भीरता लिया है, उनको यश मिलेगा भगवान के स्मरण से । अगर जीवन भर हमने अभ्यास किया है भगवान का स्मरण करने का, तो अंत में अपने आप ही भगवान का स्मरण होगा, निश्चित रूप से। ये श्लोक बहुत आशादायी है। चेतावनी अगर हम मृत्यु के समय कुछ दूसरा सोचेंगे, तो वहाँ चले जाएँगे। जैसे भरत महाराज So Be serious and take your preparation very seriously. (इसलिए हमें अपनी भक्ति को बहुत गम्भीरता से लेना चाहिए) हमें ये श्लोक चोकन्ना रहने के लिए बताया है, ताकि हम causal ना रहे। चेतावनी क्या है, की गड़बड़ मत करो, अपराध मत करो, अंदर भौतिक इच्छायें...