Bhagvad Gita - 7.07 Discussion - 04 aug 2020
Bhagwad Gita . 7.07
मत्त: परतरं नान्यत्किञ्चिदस्ति धनञ्जय ।
मयि सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा इव ॥ ७ ॥
मयि सर्वमिदं प्रोतं सूत्रे मणिगणा इव ॥ ७ ॥
mattaḥ parataraṁ nānyat
kiñcid asti dhanañ-jaya
mayi sarvam idaṁ protaṁ
sūtre maṇi-gaṇā iva
kiñcid asti dhanañ-jaya
mayi sarvam idaṁ protaṁ
sūtre maṇi-gaṇā iva
- भगवान के तीनो प्रकार के रूप वेदों में बताए गए है।
- ब्रम्ह
- परमात्मा
- भगवान
- अलग अलग लोगों की अद्यतमिक श्रेणी के अनुसार उनको उनके गंतव्य मिलते है।
- लेकिन परम सत्य भगवान श्री कृष्ण है।
- निराकार ब्रम्ह भी सत्य है, लेकिन भगवान श्री कृष्ण परम सत्य है।
- अगर परम सत्य निराकार है, तो उसको कोई पुरुषम कैसे बोल सकते है। इसलिए परम सत्य भगवान है।
- निर्विशेषम नहीं बोला है।
- ऐसा नहीं है की उनको ग्रामर नहीं आता है।
- पुरुषम शब्द का उपयोग बार बार आता है।
- इस संसार में सबसे बड़ी authority ब्रम्हा जी की है, वो बोल रहे है की ईश्वर परम कृष्ण। तो हमें क्यों आफ़त आनी चाहिए।
- जब भगवान ये बोल रहे है की मेरे ऊपर कोई सत्य नहीं है। तो कोई कह सकता है, की ये बहुत arrogance की बात है।
- लेकिन ये arrogance की नहीं, प्रेम की बात है।
- क्योंकि उस समय अर्जुन एक confused जीवात्मा का रोल निभा रहे है।
- एक ऐसे व्यक्ति को, जिसको पता नहीं चल रहा है, की मै कौन हूँ, कैसे सब कुछ चल रहा है, ये संसार क्या है, यहाँ हो क्या रहा है, क्या करूँ क्या नहीं करूँ।
- उसमें कोई व्यक्ति आकर कहता है, की अरे चिंता मत करो, जो मै बोल रहा हूँ, वो करो।
- क्यों?
- क्योंकि मैं जो बोल रहा हूँ, वो ही सत्य है, मेरे आगे कोई सत्य है ही नहीं।
- अर्जुन को ये विश्वास दिलाने के लिए भगवान अपनी position बता रहे है।
- की आप मेरे बोलने से करो, चिंता मत करो।
- भगवान ऐसा नहीं कहते की मैने बहुत साधना की इसलिए मैं निराकार से एकजुट हो चुका हूँ। वो कहते है की मैं भी भगवान हूँ। वो सीधा बोल रहे है, की मैं भगवान हूँ, उसको स्वीकार करना है तो करो, नहीं करना है तो मत करो।
- अगर कल उठ कर कोई व्यक्ति बोलता है, की मै भगवान हूँ, तो उसको कैसे समझे की वो भगवान है या नहीं।
- भक्ति चारु महाराज से प्रश्न
- भगवान राम और कृष्ण ने बहुत सारे चमत्कार किए है, तो उनको भगवान स्वीकार करना इतना कठिन नहीं है। लेकिन चैतन्य महाप्रभु ने तो ज़्यादा चमत्कार किया नहीं है, उनको कैसे स्वीकार करे।
- उन्होंने भी चमत्कार किए है, लेकिन सबसे बड़ा प्रमाण क्या है।
- की उनके समय के जो सबसे विद्वान और सबसे बुद्धिमान spiritual scientist उनको स्वीकार कर रहे है।
- अद्वैताचार्य
- सार्वभौम भट्टाचार्य
- नित्यानंद प्रभु
- रामानन्द राय
- प्रतापरुद्र महाराज।
- अर्जुन भी ऐसे ही आधार दे रहे है।
- असित, देवल, नारद, व्यास आदि ऋषियों ने भी कृष्ण को भगवान माना है।
- जैसे corona की जानकारी डॉक्टर से लेनी चाहिए,
- किसी भी unauthorised व्यक्ति से नहीं। car machenic और सब्ज़ी वाले से नहीं पूछना चाहिए।
- ऐसे ही भगवान की जानकारी किसी प्रामाणिक व्यक्ति से लेनी चाहिए।
- कोई भी ऐरा गेरा आदमी अगर कहता है की मै भगवान को नहीं मानता। तो उसके मानने या या ना मानने से कुछ नहीं होता।
- जिनकी कोई spiritual साधना है, जिन्होंने मेहनत की है, ऐसे विद्वानो से हम पूछेंगे।
- कृष्ण सबसे बड़ी authority है, वो बता रहे है की मै भगवान हूँ।
- This is how we accept krsna as supreme Lord based on authority of spritually advanced souls.
- जैसे श्रिला प्रभुपाद
- भगवान जो गीता में जीवात्मा को बता रहे है, वो अहंकार के वाक्य नहीं है, वो भगवान के प्रगाढ़ प्रेम के कारण भगवान अर्जुन को अपनी स्तिथि बता रहे है।
- और ऐसे व्यक्ति के साथ आप प्रेम का सम्बंध जोड सकते है, ये भक्ति की शक्ति है।
- जिसको ब्रम्हा जी भी सही से समझ नहीं पाते, ऐसे व्यक्ति से आप अपना सीधा सीधा रिश्ता बना सकते हो।
- और वो आपके साथ आदान प्रदान करेंगे।
- राधानाथ महाराज द्वारा बलराम जयंती प्रवचन के notes
- बलराम जी आध्यात्मिक बल प्रदान करते है, हमें उनको प्रार्थना करनी चाहिए आध्यात्मिक बल के लिए। आध्यात्मिक जीवन में आने वाली कठिनाइयों को पार करने के लिए हमें अध्यात्मिक बल चाहिए ही।
- बलराम जी आदि गुरु है। बलराम जी की कृपा के बिना हम श्री कृष्ण को प्राप्त नहीं कर सकते।
- हम लोगों को माया का पर्याप्त भय नहीं रहता है।
- माया की शक्ति से हम अपने ग़लत कार्य को भी सही मानते है, जैसे कंस को लगता था की वो सब कुछ ठीक ही कर रहा है। माया हमें ऐसे convince करती है, की हम ही ठीक है, और सारी दुनिया ग़लत है।
- भक्ति कोई race नहीं है।
- हमें कभी औरों से तुलना करके भक्ति के कार्य नहीं करने चाहिए। की वो इतना करता है, मैं भी करूँगा।
- भक्ति में आप आज जहां पर हो, उससे थोड़ा आगे जाइए, जितनी आपकी क्षमता (capacity) है।
- Sincertiy and Consistency
- रोज़ हमें कुछ प्रयास करना चाहिए कृष्ण को और ज़्यादा प्रसन्न करने का। उसका कभी कोई अंत नहीं है। क्योंकि श्रीमती राधारानी भी रोज़ आगे जाती रहती है।
- राधारानी से अच्छा कोई भक्त नहीं है, करोड़ों गोपीजन उनको follow करने का प्रयास कर रही है, सभी बड़े बड़े सन्यासी उनको follow करने का प्रयास कर रहे है, कृष्ण को भी लगता है, की राधारानी के बिना वो अधूरे है।
- प्रभुपाद लिखते है, की "If Radharani stops dancing, then Krsna will be nowhere". Radharani has to be in service of Krsna all the time and Krsna cannot give up that service. So He comes as Chaitanya MahaPrabhu to understand Radharani's love for him.
- लेकिन ऐसे होते हुए भी वो इतनी नम्र है. उनका एक नाम है, विद्यर्थिनी। इसका मतलब है, की जो सीखता रहता है। सो हर दिन वो कुछ ना कुछ नया सीखती रहती है, जिससे वो कृष्ण को और अच्छे से सेवा कर सके।
- हमें भी ये विद्यार्थी का status स्वीकार करना चाहिए।
- हर दिन हमें कुछ ना कुछ नया सीखना चाहिए, ताकि हम कृष्ण को बेहतर सेवा कर सके।
- Trying to do something better then yesterday. And be happy with our endeavour, be confident of our sincere desire to go forward. no curse ourself that so and so devotee got ahead of me, whom i only brough into KC.
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