BG 7-15
Bhagwad Gita . 7.15
न मां दुष्कृतिनो मूढा: प्रपद्यन्ते नराधमा: ।
माययापहृतज्ञाना आसुरं भावमाश्रिता: ॥ १५ ॥
माययापहृतज्ञाना आसुरं भावमाश्रिता: ॥ १५ ॥
na māṁ duṣkṛtino mūḍhāḥ
prapadyante narādhamāḥ
māyayāpahṛta-jñānā
āsuraṁ bhāvam āśritāḥ
prapadyante narādhamāḥ
māyayāpahṛta-jñānā
āsuraṁ bhāvam āśritāḥ
- मूढ़ा
- जो अपने श्रम का लाभ स्वयं उठना चाहते है, अतः वे उसे भगवान को अर्पित नहीं करना चाहते।
- सकाम कर्मी
- वे नहीं जनते की कर्म यज्ञ के लिए है
- इसलिए वे अपने द्वारा उत्पन्न कर्मों के भार से बंधे रहते है
- प्रायः वे यह कहते सुने जाते है, की उनके पास अवकाश कहाँ की वे जीव की अमरता के बारे मे सुने। उनके लिए नश्वर भौतिक लाभ ही जीवन का सब कुछ होता है।
- कभी कभी वे लाभ के लिए रात दिन नहीं सोते। स्वस्थ्य की चिंता किए बिना भी वे कार्य मे ही संतुष रहते है।
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