Councelling meeting with Madhavananda Prabhu - 19 Dec 2020
दिनचर्या
- ब्रम्ह मुहूर्त में उठना
- लाभ
- अच्छे स्वास्थ्य और लम्बी आयु की प्राप्ति के लिए
- ब्रम्ह देखने के लिए ब्रम्ह मुहूर्त में उठाना आवश्कयक है.
- Minerals और Vitamins के absorbtion में सहायक
- सूर्योदय के १.५ घंटे पहले से सूर्योदय तक ब्रम्हा मुहूर्त होता है.
- ५ चीजे जो ब्रम्ह मुहूर्त में करनी चाहिए.
- जप और meditation
- स्वाध्याय
- दिन का प्लानिंग.
- आत्मा चिंतन
- माता पिता, गुरु और भगवान का ध्यान करना.
- चीजे जो ब्रम्ह मुहूर्त में नहीं करनी चाहिए
- भोजन
- स्ट्रेस्फुल कार्य
- केवल स्वस्थ व्यक्ति को ब्रम्ह मुहूर्त में उठना चाहिए
- किसको ब्रम्ह मुहूर्त में नहीं उठना चाहिए
- गर्भवती महिला
- वृद्ध, जिन्होंने बचपन और युवावस्था में ब्रम्ह मुहूर्त में उठने का अभ्यास नहीं किया है. जिन्होने पहले से अभ्यास किया है, बो उठ सकते है.
- शारीरिक या मानसिक रूप से बीमार व्यक्ति
- अगर रात के खाये हुए अन्न का पाचन ठीक से नहीं हुआ है तो
- सुबह कैसे उठे
- Commitment
- Consistency
- रोज सुबह एक ही समय पे उठना.
- वाणी सेवा vs वापु सेवा
- वाणी सेवा हमारे जीवन के हर क्षण उपलब्ध है.
- हम अपने शिक्षा गुरु और अन्य भक्तो की सेवा करके भी गुरु महाराज की सेवा करते है.
- किसी महान व्यक्ति के शाप से जब पतन होता है, तो उसका बहुत फायदा होता है.
- गन्धर्व ---> दासी पुत्र ----> नारद मुनि
- इस कहानी से हमारा सबसे बड़ा आकर्षण महाप्रसाद होता है. हमें अपनी पूरी प्रगति के लिए केवल महाप्रसाद पर निर्भर होना ठीक नहीं है.
- इससे हम लोग आलसी बन जायेंगे.
- ऐसे हमारा मन हमें trick करता है, की केवल महा प्रसाद खाओ.
- लेकिन ये पूरी कथा में कई हुए बहुत महत्वपूर्ण सन्देश है.
- नारद मुनि ने भक्तिवेदाँतो का बहुत अच्छी तरह से सेवा किया.
- ये conception भक्तो के लिए बहुत dangerous है. इससे हम लोग Complecent हो जाते है.
- हम लोग सोचते है की मैंने जन्म भर महाप्रसाद खाया है, मुझे back to Godhead जाने से कौन रोक सकता है. लेकिन इतना आसान नहीं है.
- जब तक हम अपनी बार बार पतन होने की प्रवृत्ति है, उसको नष्ट किये बिना हम आगे नहीं जा सकते, और ये बहुत बड़ी चर्चा का विषय है.
- सारी भगवद गीता इसलिए बताई गयी, क्योंकि अर्जुन भ्रमित हो गए. (लीला में)
- भगवान ने उन्हें महाप्रसाद खाने के लिए नहीं, बल्कि अपनी ड्यूटी अच्छे से करने का ज्ञान दिया.
- इस पूरे ज्ञान को सुनने के बाद भी अर्जुन को बीच बीच में problem होता था.
- भीष्म को कैसे मार सकता हूँ?
- कर्ण को कैसे मार सकता हूँ?
- इसलिए ऐसा नहीं है, की हम एक बार भक्ति का तत्त्व समझ लिए तो अभी हम भगवान के धाम चले जायेंगे.
- सच्चाई ये है की एक दिन हमें आत्म साक्षात्कार भी हो गया, तो भी दूसरे ही दिन हम आत्म ग्लानि में चले जाएंगे.
- जब हम कृष्णा की सेवा नहीं करते है, तो स्वाभाविक ही माया देवी की सेवा करते है.
- So a devotee lives every day for surrendering. surredering is not a one time process, surrendering is a life time process. Process is that once i surrender and then i keep on surrendering.
- लेकिन ये शरणागति और भगवन के साथ पूरा रिश्ता जोड़ना, इसमें सबसे बड़ी बाधा क्या है?
- Lust (काम)
- हमारी भक्ति के लिए पोषक atmosphere हमारे जीवन में निरंतर होना चाहिए.
- That atmosphere is service to the bhakti vedantas
- लेकिन वो atmosphere हमारे पास continously होगा ऐसा जरूरी नहीं है, इसके लिए हमें वाणी सेवा (instructions) पर ध्यान देना है.
- Instructions
- ध्यानपूर्वक और नम्रता से हरिनाम लेना
- ४ नियमो का पालन करो.
- गुरुदेव और भक्तो के सेवा सावधानी से करना.
- Service of the Lord begins with Service of Lord's Bondafide servants
- One who says that he is my devotee is not my devotee. But one who is devotee of my devotee is my devotee.
- मद भक्ता पूजाभी अधिका
- इसलिए ये हमारा आद्य कर्त्तव्य (Primary Duty) है, की हम भगवान के भक्तो के सेवा करते रहे.
- अगर हमें भक्तिवेदाँतो जैसे शुद्ध भक्तो की direct सेवा करने को नहीं मिली, तो उनकी instructions को जो फॉलो कर रहे है, जो उनकी सेवा कर रहे है अलग अलग प्रकार से, उनकी सेवा करो, उनकी मदद करो. ऐसे हमें स्वतः ही वो मिल जायेगा, जिसके लिए हम हमेशा लालायित (Hanker) रहते है. भगवान की प्रेममयी सेवा.
- लेकिन वो सस्ता नहीं है, की मैंने महा प्रसाद खा लिया, १० बार दर्शन ले लिया, रस्सी को खींचा.
- ये सब चीजे सही है, लेकिन अगर कोई सोचता है की मैं रस्सी खीचूँगा, और फिर भक्ति में जो मेरा आलस है, उसको चालू रखूंगा, तो फिर ऐसे नहीं होने वाला है.
- जैसे हम कितने दिनों से मैसेज डाल रहे है की गीता वितरण करना चाहिए, लेकिन कितने लोगो ने रिप्लाई किया?
- हम सोचते है, की कोई तो करता होगा, गीता वितरण करना चाहिए.
- But i will not go, i am busy, i will eat mahaprasad, i will chant my rounds. i am taking care of my day to day routines.
- If we have this thought proces, then we do not fit in the catagory of Narada Muni.
- नारद मुनि क्या बोल रहे है, की मैं और कुछ नहीं कर रहा था, मेरी साड़ी शक्ति भक्तिवेदाँतो के सेवा में समर्पित थी.
- हमें कौन रोकता है,, कृष्ण की निरंतर (continously) सेवा करने से, ऐसा हम अगर विचार करते है, तो आगे जाकर हम उस समस्या का समाधान कर सकते है.
- जब हम कृष्ण के सेवा नहीं करते है तो हम खुद ब खुद माया की सेवा करने लगते है.
- ऐसा मत सोचो की मुझे जितना जम रहा है, मैं कर रहा हूँ, और मैं कृष्ण भावना भावित हूँ. अरे हम माया के प्रभाव में है.
- माया का सबसे प्रभावी अस्त्र कौन सा है. (One of her greatest weapons)
- Lust (काम)
- ये बाकी सारे अनर्थो के बाप का बाप है.
- कृष्ण गीता में बताते है.
- काम एष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भव: ||
महाशनो महापाप्मा विद्ध्येनमिह वैरिणम् || गीता 3-37 || - कृष्ण बता रहे है की काम वासना हमारी सबसे बड़ी शत्रु है.
- जिसको कृष्णा प्रमाणित कर रहे है, वो कितनी बड़ी ताकत होगी.
- कृष्णा की माया कृष्ण के जितनी ही शक्तिशाली है, अंतर इतना ही है, की मायादेवी शक्ति है, और कृष्ण शक्ति के स्वामी है.
- तो अगर भगवान शक्ति के स्वामी है, तो कौन उस शक्ति को वश में कर सकते है, केवल कृष्ण ही कर सकते है.
- हमें ऐसे शत्रु को हराना है. हम इसे सस्ते में कैसे ले सकते है.
- हम सोचते है, की हम महाप्रसाद खाएंगे और माया को हरा देंगे. || 😇😇 ||
- ऐसा नहीं है, महाप्रसाद से आपको कुछ शक्ति और मिलेगी. लेकिन आपको जानना पड़ेगा की ये दुश्मन है क्या और इसकी शक्ति क्या है.
- प्रभुपाद अक्सर अपने शिष्यों से कहते थे, कि पश्चिमी देशों के शिष्यों की समस्या यह है कि आप माया से पर्याप्त रूप से डरते नहीं हैं।
- लेकिन आज, भारत में परिदृश्य (scenario) यह है कि आप पश्चिमी देशों की तुलना में अधिक पश्चिमी हैं।
- तो basically हम वासना नामक इस दुश्मन से पर्याप्त रूप से डरते नहीं हैं, जो माया की प्रमुख शक्ति है। For us, Maya is personified as lust.
- हम इसके लिए कृष्ण को दोषी नहीं ठहरा सकते की तुम्हारे महाप्रसाद ने काम नहीं किया.
- समस्या यह है कि हम स्वेच्छा से माया में आ रहे हैं। क्योंकि यह हमारी अपनी इच्छाओं द्वारा बनाई गई है।
- 1:02 hr
- ये काम वासना नाम का शत्रु कहाँ बैठा है?
- हमारी इन्द्रियों, मन और बुद्धि में. https://vedabase.io/en/library/bg/3/40/
- हमारे पास ये तीन ही चीज़े है
- कोई भी कार्य हम अपनी इन्द्रियों से करते है.
- मन इन्द्रियों कोनिर्देशन (guide) करता है.
- और बुद्धि बताती है की ये करना है या नहीं करना है.
- ये तीनो चीज़े ही माया के प्रभाव में है, तो अपना क्या chance है फिर. हमारा कोई chance नहीं है इस युद्ध में जीतने का, क्योंकि सारी stretegic positions पहले ही हमारे शत्रु ने कब्ज़ा रखी है.
- १:०३ hr
- लेकिन कृष्ण बहुत दयालु और wonderful (अद्भुत) है.
- वो हमें ये कहकर नहीं छोड़ते की तुम्हारा कोई चांस नहीं है.
- भगवान् इसका समाधान भी बताते है.
- https://vedabase.io/en/library/bg/3/41/
- अपने मन और इन्द्रियों को regulate करो.
- Disciple means Discipline.
- ये नियम्य बहुत ही महत्त्वपूर्ण है.
- ४ निषेध नियम
- नियमपूर्वक जप करना.
- सुबह ब्रम्ह मुहूर्त में उठना.
- नियमित रूप से भक्तो से संग करना.
- शाश्त्रो का नियमित रूप से अध्ययन करना और उनपर चर्चा करना.
- फिर भी हम ढीले क्यों पड जाते है.
- इन्द्रियों को नियंत्रित कैसे करे?
- इन्द्रियों के विषय (sense objects ) इन्द्रियों से ज्यादा शक्तिशाली होते है. क्योंकि जहाँ विषय होते यही, वहां इन्द्रियां तुरंत जाती है.
- लेकिन मन इन्द्रिय विषयो से ज्यादा शक्तिशाली होता है.
- अगर हमारा मन प्रशिक्षित (trained), संतुष्ट और प्रसन्न है, तो फिर वो इन्द्रिय विषयो के पीछे नहीं जायेगा.
- higher taste is the key to give up the lower taste
- Trying to give up sense objects, Trying to control the senses without controlling the mind, without giving a positive attachment to the mind, it is an impossibility.
- 60000 years of extremely austere tapasya of a big maharathi like vishwamitra, he was completely enamoured by just hearing the ankle bells of menaka.
- परम दृष्ट्वा निवर्तते.
- १:११ hr
- The mind has to be given a higher engagement
- What is that higher engagement?
- Service to the Bhaktivedanta.
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