Bhagvad Gita - 6.35 Discussion - 29 July 2020

Bhagwad Gita . 6.34

श्रीभगवानुवाच
असंशयं महाबाहो मनो दुर्निग्रहं चलम् ।
अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते ॥ ३५ ॥
śrī-bhagavān uvāca
asaṁśayaṁ mahā-bāho
mano durnigrahaṁ calam
abhyāsena tu kaunteya
vairāgyeṇa ca gṛhyate

  • इस श्लोक में भगवान बता रहे है की मन को अभ्यास और वैराग्य के द्वारा सम्भाल सकते है।
    • अभ्यास 
      • नव विधा भक्ति का अभ्यास।
    • वैराग्य
      • भक्ति की विधि में Higher taste मिलने से हम Lower taste आसानी से छोड़ सकते है।
      • Viragya is due to attachment to Krsna. ये स्वाभाविक विधि से अपने आप आता है।
  •  महाप्रभु बताते है, की कैसे हमें पता चले की हम भक्ति में प्रगति कर रहे है। 
    1. वैराग्य (इंद्रिय भोग के प्रति)
      • It means Krsna is kind to me.
    2. हरिनाम के प्रति आकर्षण (रुचि)
    3. Genuine humility 
  • भक्ति करने से और ज़्यादा भक्ति मिलती है, इसे हम कैसे समझे?
    • कभी कभी हम लोग सोचते है, की 
      • मैं एक दिन भगवान के धाम में चला जाऊँगा। 
      • मेरा सपना है, एक दिन, मै भगवान के धाम में चला जाऊँगा। 
    • ये हमारी मूर्खता है, आज ही हम लोग भगवान के धाम में है। इसी क्षण में हम कृष्ण के साथ है। क्योंकि, आप कृष्ण के पास जाकर करने वाले क्या हो?
    • वहाँ पर जाकर भी आप नवधा भक्ति ही करोगे।
    • तो आज ही करो ना, कल क्यों करना है, मरने के बाद क्यों करना है। 
    • इसलिए चैतन्य महाप्रभु कहते है। मम जन्मनी जन्मनिश्वरे।
    • तुकाराम महाराज कहते है,  की मुझे वापस गर्भ में डालो कोई प्रॉब्लम नहीं।
    • प्रह्लाद भी वोहि कहते है, की मै नरक में भी जाऊँगा तो भी आपका ही स्मरण करूँगा, स्वर्ग में जाऊँगा तो भी आपका ही समरन करूँगा, वैकुंठ में जाऊँगा तो भी आपका ही स्मरण करूँगा। 
    • भक्त के लिए सब जगह वैकुण्ठ ही है, भौतिक और आध्यात्मिक जगत जैसी कोई distinction ही नहीं है।
    • आज ही वो वैकुंठ में रह रहा है, ख़ाली उसका जो एक material side है, वो उसको खींचते रहता है।
      • सो हम जितना spiritual side में जाएँगे, उतना ही हमारी भक्ति धीरे धीरे शुद्ध होती जाएगी। 
    • आप आज भी वैकुंठ में हो, चिंता मत करो, वैकुंठ में जाकर भी आपको यही करना है। 
  • वैकुंठ में हर तरफ़ भक्त ही भक्त है। और वहाँ कोई compition भी नहीं है।
    • वहाँ अगर compitition करना चाहेंगे, तो नीचे भेज देते है। 
    • वहाँ भक्ति का ऐसा माहौल है, की सब लोग ऐसा सोचते है, की ये जो दूसरा व्यक्ति है ना, इसकी भक्ति मुझसे अच्छी है, उसको करने दो, मैं उसको assist करूँगा।  
    • Why not have the same mood right now today, why not practice it today.

Comments

Popular posts from this blog

BG selected verses from Shloka Ratnavali Book

Bhagvad Gita - 5.18 Discussion - 21 July 2020

Bhagvad Gita 4.01 Disucssions - 12 July 2020