Bhagvad Gita - 4.11 Discussion - 19 July 2020
Bg. 4.11
ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम् ।
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥ ११ ॥
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्याः पार्थ सर्वशः ॥ ११ ॥
- कृष्ण का पूर्ण साक्षात्कार तो उनके शुद्ध भक्त ही कर पाते है।
- भकत्या माम अभिजानाती
- भक्त भगवान को सबसे अच्छा समझते है
- प्रत्येक व्यक्ति की सफलता भगवान की कृपा पर आश्रित रहती है।
- जब कृष्ण कहते है, की किसी ना किसी तरह से हर एक जीवात्मा उन्ही की सेवा कर रहा है।
- माया शक्ति के द्वारा
- ज्ञान योग
- कर्म योग
- अष्टांग योग
- या भक्ति योग के द्वारा
- तो हमें इस श्लोक का पिछले श्लोकों से सम्बंध देखना है।
- भगवद गीता 4.09 में भगवान कहते है, की जब कोई मेरे जन्म और कर्म के दिव्यतव को तत्तवतः जानता है, तो वो निश्चित ही मेरे पास आएगा, और वापस इस संसार में नहीं आएगा। क्योंकि वो मुझसे प्रेम में बांध जाएगा।
- श्लोक 4.10 में भगवान कहते है, की आप अकेले नहीं हो, पहले भी बहुत सारे लोगों ने मुझे इस प्रकार प्राप्त किया है। ये एक Highway है, मेरे पास आने के लिए।
वीतरागभयक्रोधा मन्मया मामुपाश्रिताः ।
बहवो ज्ञानतपसा पूता मद्भावमागताः ॥ १० ॥
बहवो ज्ञानतपसा पूता मद्भावमागताः ॥ १० ॥
- लेकिन और भी बहुत सारे मार्ग है, जो मुझसे दूर या इधर उधर जाते हुए लगते है। लेकिन वो सब मेरा ही प्रबंध है।
- भगवान की कृपा
- भगवान इतने दयालु है, की वो जानते है, कि सब लोग शायद वो सब नहीं कर पायेंगे, जो वो बता रहे है।
- जैसे की आसक्ति, भय, क्रोध से छुटकारा पता तो भौतिक संसार में बहुत कठिन काम है।
- तो इसलिए ऐसे लोग होंगे, जिनको ये पूरी तरह से जमेगा नहीं।
- तो भगवान कह रह रहे है, को मैं उनको छोड़ नहीं दे रहा हूँ।
- लेकिन इसका मतलब ये नहीं है, की हम कुछ भी कर सकते है अपने जीवन में।
- भगवान कह रहे है, की आप कुछ भी करते रहो, मैं उसे स्वीकार करूँगा। ये उनकी kindness है।
- भगवान ऐसा नहीं कह रहे है, की वो आपको कुछ भी करने के लिए अनुमति दे देंगे।
- लेकिन आपकी वर्तमान स्तिथि और conditioning में आप इतना कर सकते हो, कोई बात नहीं, लेकिन आप मेरे पास ही आओगे।
- अगर हम की देवता को पूजते है, देवता भी भगवान की दी हुई शक्ति से उनकी इच्छा के अनुसार ही कार्य कर रहे है।
- यज्ञ कर रहे है, तो यज्ञेश्वर कृष्ण ही है।
- भगवान इस प्रकार से हमें संकेत दे रहे है, की मैं किसी को भी accomodate करने के लिए तैयार हूँ।
- लेकिन मतलब ये नहीं है, की हम कुछ भी करेंगे और हम automatically भगवान के पास ही पहुँचेंगे।
- कैसे पहुँचेंगे, जब हम ये समझ जाएँगे, की भगवान का जन्म और कर्म दिव्या है। (गीता 4.09)
- लेकिन हम बहुत सारे indirect रास्ते भी पकडेंगे, तो भी भगवान हमारा त्याग नहीं करते है।
- भगवान हमारी इच्छा के अनुसार हमें फल देंगे ।
- लेकिन अगर आप एक भक्त है, तो भगवान आपका विशेष ध्यान रखते है, और हो सकता है, वो आपको वो नहीं दे, जो आपकी इच्छा है।
- भगवान भक्त वत्सल है, तो भक्त से प्रेम करते है।
- जैसे पिता अपने पुत्र से प्रेम करता है। अगर पुत्र बोलता है, पापा आज मुझे सिगरेट पीनी है, 50 रुपए दे दो। तो पिता 50 रुपए के बजाए एक लाफ़ा (थप्पड़) दे देंगे। क्योंकि वो पुत्र से प्रेम करते है।
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