Bhagvad Gita - 4.02 Discussion - 13 July 2020

  • पूर्ण गीता का ज्ञान अपुरषेय  है।
    • ये स्वयं भगवान की वाणी है 
    • जीवात्मा में ये 4 कमियाँ हमेशा रहती है।
      • Imperfect senses
      • Tendency to get illusioned.
      • The tendency to commit mistakes.
      • Tendency to cheat others.
      • जिसमें ये चार चीजें है। उनसे आया हुआ ज्ञान कभी पूर्ण नहीं हो सकता।
    • लेकिन भगवान 6 ऐश्वर्यों से पूर्ण है। उनका एक ऐश्वर्य है, पूर्ण ज्ञान।
  • हमें प्रामाणिक गुरु शिष्य परम्परा से ही ज्ञान क्यों स्वीकार करना चाहिए?
    • जैसे फ़र्ज़ी और सही दवाई एक जैसे ही दिखती है।
    • फ़र्ज़ी और सही नोट एक जैसे ही दिखते है।
      • लेकिन जिस नोट को रिज़र्व बैंक ने दिया है। वो सही होता है। 
    • जो ज्ञान प्रामाणिक यूनिवर्सिटी से आता है। उसी की वैल्यू है।
    • जैसे अगर कोई व्यक्ति हमें अपने से ही engineering की डिग्री दे दे, तो उसकी कोई वैल्यू नहीं है।
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    • जब हम बहुत गंभीर और गहरे विषय को जानना चाहते है। विषय क्या है?
    • हमारा अस्तित्व क्यों है। हम कौन है? इस संसार का मतलब क्या है? हम इस संसार में क्यों आए हुए है? क्या प्रयोजन है? ये सारे प्रश्न और इनका उत्तर बहुत गुप्त ज्ञान है।
    • भगवद गीता बाज़ार में मिल जाती है। लेकिन फिर भी वो बहुत गुप्त ज्ञान है।
    • अगर आप अनाथ व्यक्ति हो, और एक व्यक्ति आपको बताता है। कि मैं आपको एक रहस्य बताता हूँ। मैं जानता हूँ कि आपका पिता कौन है, आपकी माता कौन है। मैं ये भी जानता हूँ कि वो बहुत अमीर व्यक्ति है। ये भी जानता हूँ कि उसके पास कैसे पहुँचा जा सकता है। तो हम उस व्यक्ति को प्रसन्न करने के लिए आप कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाओगे। 
    • हमारा अस्तित्व त्रिविध तापो से ग्रस्त है। इस संसार की सुख और दुःख की लहरो पे हम गोते खा रहे है। मार पर रही है। लहरो पे हमें पटका जा  रहा है। और हम ज़िंदा रहने के लिए संघर्ष कर रहे है। बहुत डरावनी परिस्तिथि है। उसमें कोई व्यक्ति बोल रहा है कि चिंता मार करो, मैं आपको किनारे पर लेकर जाऊँगा। आपके पिता महान व्यक्ति है। वो आपकी रक्षा कर लेंगे। ये व्यक्ति गुरुदेव है, और ये गुरु परम्परा है।
  • हमारा भाग्य 
    • हम लोगों को गुरुदेव के लिए बहुत क्रतज्ञ होना चाहिए, कि उनके कारण हमें ये बहुत सीक्रेट ज्ञान मिल रहा है।
      • सीक्रेट क्या है? भगवद गीता तो बाज़ार में मिल जाती है।
      • गीता का mood गुप्त है। श्लोक नहीं।
    • जब सूट गोस्वामी नेमिश्यारण्य के कथा शुरू करने वाले होते है, तो वहाँ साधु उनको करते है, की हमारा कौन सा भाग्य है की हम आज आपको मिल पाए। 
    • ये हमारा बहुत बड़ा भाग्य है, कि  हम ऐसी परम्परा में आए है, और हमें ये गुह्य ज्ञान का mood प्राप्त हो रहा है, प्रभुपाद और उनके  पहले के आचार्यों और शुद्ध भक्तों की वाणी से और उनके आचार से।
    • शुद्ध भक्त भगवद गीता को रटता नहीं है। वो भगवद गीता को जीता है। उसको हो सकता है की भगवद गीता के श्लोक नहीं आते हो। लेकिन भगवद गीता उसके आचरण में ठूँस ठूँस के भरी होती है। हर क्षण हर पल वो गीता के माध्यम से ही जीता है। और ये अनुभूति हमें केवल गुरु परम्परा में ही आएगी।
    • इसलिए हमें जानना चाहिए की हम कितने भाग्यवान है। कि किसी भक्त के आशीर्वाद से, प्रेरणा से हम गुरु परम्परा से जुड़े हुए है। इसलिए हमें भक्तों के लिए भी बहुत क्रतज्ञ होना चाहिए।
  • हमें अपनी दुर्बुद्धि को punish कैसे करना  चाहिए।
    • उसके neglect करके। 
    • you cannot punish your body and mind. just neglect it. do not allow maya to take over. माया तो हमारे आस पास हमेशा रहेगी ही। लेकिन उसका प्रभाव होने के लिए उसको attention देना पड़ता है। 
    • We may not be able to maintain this consciousness all the time.  But by दृढ़वृत क्षात्र प्रव्रत्ति, we will try to maintain it.
    • Because we are trying to maintain it. then Krishna helps us. because we are trying to take his shelter. 
    • भगवान गीता में बताते है, कि  जो मेरी शरण में आएगा, उसको मैं माया से दूर रखता हूँ। 
    • Therefore, when we chant, we try to take shelter of Krsna. Chant very sincerely.  
    • हरिनाम चैतन्य महाप्रभु के द्वारा दी हुई दवा है। वो दवा कैसे लेनी चाहिए? और उसके क्या परिणाम होंगे, यही हमारा shikshashtakam है। 
    • दवा लेने का तरीक़ा क्या है, अमानीना मान देना। जो सम्मान नहीं देता, उसको भी सम्मान दो। नम्र बनना हमारे हाथ में नहीं है। लेकिन सम्मान देना हमारे हाथ में है। 
    • नम्र देना हमारे मान का भाव है। लेकिन हम सम्मान ऊपर से भी दे सकते है। उसमें भी भावना होनी चाहिए, लेकिन कम से कम हम वैष्णवों, अपने से बड़ों और सभी जीवों को सम्मान दे। then we can chant the holi names constantly. and that is how we take shelter of Krsna and Krsna take care of Maya. He will tell maya, keep quiet, he is my man, dont touch. that is how it is.
  • मीराबाई और अन्य संत जो लोग 4 परम्परा में नहीं आ रहे है, उनको कैसे समझे?
    • अगर परम्परा के लोग किसी भक्त को स्वीकार करते है। तो हम उनको स्वीकार करते है।
    • मीराबाई किसी गुरु परम्परा से connected नहीं थी। ऐसा हमें पक्का पता नहीं है।
    • जो मार्ग हमें पक्का पता हो, वही मार्ग लेना चाहिए।
  • Prabhuji requested devotees to share in first part of the Bhagwad Gita disucussion and ask questions towards the end.
  • संस्कृति और शिक्षा को maintain  करना क्षत्रियों का कार्य है।
    • राजा होना काफ़ी नहीं है। राजर्षि होना ज़रूरी है।
    • शिवाजी महाराज 
    • प्रतापरुद्र महाराज 
  • एक राजर्षियों की परम्परा होती है। और एक संतो की परम्परा होती है। संतो की परम्परा ज्ञान का प्रचार करती है। और राजर्षियों कि  परम्परा ज्ञान को स्थापित करती है।

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